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अकेले रहना अच्छा लगता है


antarvasna, hindi sex story मेरी शादी को 10 वर्ष पूरे हो चुके हैं इन 10 वर्षों में मेरे और मेरी पत्नी के बीच कभी भी कोई दिन ऐसा नहीं था जब हम दोनों के बीच झगड़ा नहीं होता, हम दोनों में हर रोज झगड़ा होता लेकिन जैसे कैसे हम दोनों ने 10 वर्ष निकाल लिए परंतु अब मैं अपनी पत्नी से बहुत परेशान हो चुका था और मैं उससे अलग होने की सोचने लगा लेकिन ना तो वह मुझसे अलग होना चाहती थी और ना ही मुझे छोड़ना चाहती थी मैंने उसे कई बार समझाया कि तुम अपने आप को बदल क्यों नहीं लेती लेकिन वह ना तो अपने आप को बदलना चाहती और ना ही कभी मेरी बात को ध्यान से सुना करती, मैं कभी भी उससे कुछ दिल की बात करता तो वह हमेशा ही मुझसे कहती कि तुम भला कब तक मुझसे यह बात करते रहोगे।

मैंने उसे कई बार इस बारे में बात की कि हम दोनों को अब अलग हो जाना चाहिए यदि हम दोनों एक साथ रिलेशन में नहीं रह सकते तो हम दोनों को अपने रास्ते बदल लेना चाहिए लेकिन उसकी तो जैसे कुछ समझ में ही नहीं आता और वह हमेशा मुझे कहती कि भला मैं तुमसे दूर क्यों जाऊं और झगड़ा तो तुम भी करते हो, मैंने उससे बात करना ही बंद कर दिया था। एक दिन हम दोनों के बीच बहुत ज्यादा झगड़ा हो गया मैंने उसे कहा देखो प्रियंका अब तुम कुछ ज्यादा ही झगड़ा करने लगी हो जिसकी वजह से हमारे घर पर इस चीज का बुरा असर पड़ता है, मैंने उसे कहा कि तुम यह क्यों नहीं सोचती कि बच्चे अब बड़े होने लगे हैं और हमारे झगड़ों का उन पर बुरा असर पड़ने लगा है वह हम दोनों के बारे में क्या सोचेंगे लेकिन प्रियंका को तो जैसे इस बात की फिक्र ही नहीं थी वह हर दिन मुझे ही दोषी ठहराती थी, वह मुझे कहती कि मेरी सहेलियों के पति तो उनका कितना ध्यान रखते हैं लेकिन तुम तो मेरा ध्यान ही नहीं रखते और तुम्हारे पास तो मेरे लिए समय ही नहीं होता, मैंने उसे कहा देखो प्रियंका यह बात नहीं है अब तो तुमने सिर्फ दिमाग में यह बात बैठा ली है कि तुम्हें मुझसे झगड़ा करना है लेकिन तुम इस बात को समझ क्यों नहीं लेती कि हम दोनों के झगड़ा करने से कोई फायदा होने वाला नहीं है, हम दोनों के बच्चे भी अब बड़े होने लगे हैं लेकिन वह अपना रवैया ना तो बदलना चाहती थी और ना ही उसे कभी मेरी बात समझ आती थी। एक दिन मैंने उसे गुस्से में कहा कि मैं अब तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहता मुझे अकेला रहना है, मैंने उससे अलग रहने का निर्णय कर लिया था की मैं अब प्रियंका के साथ किसी भी रिलेशन में नहीं रहना चाहता और हम दोनों को अपने रिश्ते को खत्म कर देना चाहिए।

मैंने इसके लिए उसके मां बाप से बात की, वह कहने लगे कि बेटा तुम दोनों आपस में बात क्यों नहीं कर लेते, मैंने उनसे कहा देखिए मैंने तो उससे काफी बार समझा लिया और इतने बरसों से मैं उसे समझा ही रहा हूं की छोटी-छोटी बातों को बड़ा करना बिल्कुल भी सही नहीं है लेकिन वह अपना रवैया बिल्कुल बदलना नहीं चाहती। जब मैं प्रियंका के माता-पिता से बात कर रहा था तो उसकी छोटी बहन सुमन और आई वह मुझे कहने लगी कि आप लोग आपस में बात क्यों नहीं कर लेते, मैंने सुमन से कहा देखो सुमन मैंने प्रियंका से कई बार इस बारे में बात की लेकिन वह ना तो बदलना चाहती है और ना ही उसे कुछ फर्क पड़ता है, सुमन कहने लगी मैं इस बारे में दीदी से बात करुंगी। सुमन ने उसी वक्त अपनी बहन को फोन किया तो प्रियंका मुझे ही दोषी ठहराने लगी हालांकि सुमन को भी पता है कि प्रियंका की ही गलती रहती है परंतु वह अपनी बहन को दोषी नहीं ठहरा सकती इसलिए उसने मुझे कहा कि जीजा जी आप लोगों को आपस में बात करनी चाहिए, मैंने अब प्रियंका से अलग रहने का फैसला कर ही लिया था। मैं जब घर पहुंचा तो मैंने प्रियंका से कहा देखो प्रियंका अब तुम बिल्कुल भी बदलने वाली नहीं हो मैं अब अकेले ही रहना चाहता हूं, मैंने उसे कहा कि तुम बच्चों का ध्यान रखना, मैं उस रात घर से निकल पड़ा और मैंने सोच लिया कि घर पर मुझे शांति नहीं मिलने वाली इसलिए मैं किसी और जगह रहने चला जाता हूं मैंने किराए पर एक फ्लैट ले लिया और मैं उस फ्लैट में रहने लगा मैंने किसी को भी नहीं बताया कि मैं कहां रहता हूं। प्रियंका मुझे हर दिन फोन करती मैं उसे कहता कि अब मैं अलग ही रहना चाहता हूं तुम पैसों की कोई चिंता मत करना मैं तुम्हें समय पर पैसे भिजवा दूंगा और अब मैं अपना जीवन जीना चाहता हूं।

प्रियंका को तो जैसे मुझसे कभी प्यार था ही नहीं क्योंकि उसके माता पिता ने मुझसे बहुत कुछ चीजें छुपाई थी उसका पहले ही किसी लड़के के साथ अफेयर था और वह लोग आपस में शादी करना चाहते थे लेकिन जब से मेरी शादी प्रियंका से हुई तब से मैं अपने जीवन में बिल्कुल भी खुश नहीं था इसलिए मैंने अलग रहने का निर्णय किया, जब से मैं अलग रहने लगा तब से मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था क्योंकि आए दिन के झगड़ों से तो मैं परेशान हो ही चुका था। एक दिन मुझे सुमन का फोन आया वह कहने लगी जीजा जी आप कहां चले गए हैं दीदी तो कुछ भी नहीं बता रही, मैंने सुमन से कहा देखो सुमन अब मैं अपना जीवन अकेला जीना चाहता हूं मैं अपने पारिवारिक झगड़े से बहुत ज्यादा परेशान हो गया हूं और मैं नहीं चाहता कि अब यह झगड़े ज्यादा बढ़े, सुमन मुझे कहने लगी जीजा जी मैं आपसे एक बार मिलना चाहती हूं, मैंने सुमन से कहा देखो सुमन अब हम लोग मिलकर भला क्या करेंगे मैंने तो कई बार प्रियंका से बात की और तुमने भी उसे कई बार समझा दिया लेकिन उसे ना तो कभी कुछ समझ आती है और ना ही वह कुछ समझना चाहती है इसलिए अब मैं अलग ही रहना चाहता हूं।

मैंने उस दिन सुमन का फोन रख दिया मैं हर रोज सुबह अपने ऑफिस के लिए निकल जाता और शाम के वक्त मैं ऑफिस से लौटता था अब तो जैसे मुझे अलग रहने की आदत हो चुकी थी काफी समय बाद मुझे सुमन का फोन आया क्योंकि मैंने अपना ऑफिस ही बदल लिया था इसलिए किसी को भी पता नहीं था कि मैं कहां रहता हूं, एक दिन सुमन ने मुझे फोन किया तो मैंने उसका फोन उठा लिया, सुमन मुझसे कहने लगी कि जीजा जी मुझे आपसे मिलना है मैं नहीं चाहती कि मेरी बहन की जिंदगी ऐसे बर्बाद हो, मैंने सुमन से कहा देखो सुमन मैंने प्रियंका को कुछ भी चीज की कमी नहीं होने दी मैं उसे हर महीने पैसे भिजवा दिया करता हूं और उसे किसी भी चीज की कोई तकलीफ नहीं है परंतु सुमन मुझसे जिद करने लगी कि मुझे आपसे से आज ही मिलना है, मैंने उसे कहा कि ठीक है मैं तुमसे एक शर्त पर मिलूंगा, तुम किसी को भी यह बात नहीं बताओगी कि मैं कहां रहता हूं, सुमन कहने लगी ठीक है जीजा जी मैं किसी को भी नहीं बताऊंगी। सुमन मुझसे मिलने के लिए मेरे फ्लैट पर आ गई लेकिन वह सिर्फ वही बात कर रही थी कि दीदी और आप अब एक साथ रहो, मैंने सुमन से कहा देखो सुमन मैंने इतने वर्ष प्रियंका के साथ बिता दियर लेकिन कभी भी मुझे ऐसा महसूस नहीं हुआ कि हम दोनों के बीच प्यार है, हम लोगों का हर रोज झगड़ा होता है और इस झगड़े की वजह से बच्चों पर भी बुरा असर पड़ता है मैं नहीं चाहता कि अब हम एक साथ रहे इससे अच्छा यही है कि अब मैं अलग ही रहूं। सुमन और मै आपस में बात करने लगे, सुमन मुझसे कहने लगी जीजाजी मैं नहीं चाहती कि मेरी बहन का घर बर्बाद हो। मैंने सुमन से कहा देखो सुमन ना तो तुम्हारी बहन के साथ में खुश हूं और ना ही हम दोनों के बीच कोई भी रिलेशन है।

मैंने ना जाने कबसे उसके साथ अच्छे पल भी नहीं बिताया है, सुमन कहने लगी लेकिन जीजाजी मैं तो दीदी से पूछती हूं तो वह कहती है हम दोनों के बीच अभी कुछ दिन पहले ही सेक्स हुआ था। मैंने सुमन से कहा तुम मेरे दिल की बात क्या जानो हम दोनो अपनी बातों में इतना खो गए कि मैंने सुमन का हाथ पकड़ लिया। सुमन को अपनी बाहों में ले लिया मैंने जब उसकी जांघ पर हाथ फैरना शुरू किया तो उसकी चूत से पानी निकल रहा था मैंने जैसे ही उसके सूट के नाड़े को खोला तो उस चूत को मैंने अपनी जीभ से चाटना शुरू किया। उसकी चूत से पानी बाहर की तरफ निकल रहा था पहली बार उसकी चूत को किसी ने चाटा था सुमन गरम हो चुकी थी मैंने जैसे ही धक्का देते हुए उसकी चूत के अंदर लंड को प्रवेश करवाया तो वह चिल्लाने लगी मैंने बड़ी तेजी से उसे चोदना शुरु किया उसके मुंह से चीख निकल जाती मेरे अंदर भी जोश बढ़ता ही जा रहा था। वह मुझे कहने लगी आप खुश है मैंने उसे कहा लेकिन मैं तो सिर्फ तुम्हारे साथ खुश हूं मुझे कितने समय बाद किसी के साथ अच्छे से सेक्स करने का मौका मिला है।

वह कहने लगी लेकिन दीदी तो हमेशा कहती है हम दोनों के बीच बहुत अच्छे से सेक्स होता है। मैंने उसे कहा तुम्हारी दीदी पर तो मै अब बिल्कुल भी भरोसा नहीं करता उसके साथ ना जाने मैंने कब से सेक्स नहीं किया लेकिन तुम्हारे साथ बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। वह मेरे गले लगकर कहने लगी जीजा जी आप ऐसे ही करते रहो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है। मैंने उसे कहा मुझे भी बहुत अच्छा महसूस हो रहा है मुझे इतना ज्यादा मजा आ रहा था। मुझे उसे छोड़ने का मन नहीं हुआ जैसे ही मेरा वीर्य उसकी टाइट योनी के अंदर गिरा तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ वह भी खुशी से झूम उठी। वह कहने लगी जीजाजी आपका लंड चूत मे लेकर मुझे बहुत ही अच्छा महसूस हुआ आपके साथ जिस प्रकार से मैंने आज समय बिताया और आपके साथ जैसे मैंने सेक्स किया मुझे बहुत मजा आ गया। मैंने सुमन से कहा तुम यह किसी को मत बताना मैं कहां रहता हूं। वह कहने लगी मैं किसी को भी नहीं बताऊंगी मैं तो आपसे मिलने आ सकती हूं। मैंने उसे कहा हां तुम्हारा जब भी मन हो तो तुम मुझसे मिलने आ जाना, मैं समय पर प्रियंका को पैसे भिजवा दिया करता।


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