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मामी की जवानी के मजे लिए


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मेरा नाम संजय है और मैं मध्य प्रदेश के एक छोटे से कस्बे से आता हूं। मेरी उम्र 26 वर्ष हो चुकी है। हमारे यहां पर नौकरियां नहीं है इस वजह से मैंने अपने मामा को फोन किया और कहा कि मुझे वह शहर में ही नौकरी लगा दें। उन्होंने मुझे कहा कि तुम एक काम करो, तुम मेरे पास आ जाओ मैं तुम्हें नौकरी लगा दूंगा। वैसे भी हम लोग घर पर अकेले हैं। मेरे मामा का नाम धीरेंद्र है और वह जयपुर में रहते हैं। उनकी पत्नी का नाम मीना है और वह भी बहुत अच्छे हैं। उनके दोनों बच्चे सरकारी नौकरी हैं। इस वजह से वह घर पर नहीं रहते हैं और वह घर पर अकेली हैं। मैंने अपने पिताजी से बात करी तो वह कहने लगे कि तुम शहर ही चले जाओ। क्योंकि वहां पर तुम अच्छी नौकरी भी मिल जाएगी और तुम अपने हिसाब से काम भी कर पाओगे।

मैंने भी पूरा फैसला कर लिया था और मैं जयपुर चला गया। जब मैं जयपुर गया तो मेरे मामा मुझसे मिलकर बहुत खुश हुए और वह मेरे घर के हाल चाल पूछने लगे। मैंने उन्हें बताया कि घर पर तो सब ठीक है पर मेरी स्थिति कुछ ठीक नहीं चल रही। क्योंकि मुझे अपने यहां पर कोई भी काम नहीं मिल पा रहा है। मेरे मामा ने कहा तुम उसकी चिंता मत करो, मेरी काफी जान पहचान है। मैं तुम्हारी कहीं ना कहीं नौकरी लगवा ही दूंगा। तुम उसके लिए बेफिक्र रहो और मेरी मामी भी बहुत ज्यादा अच्छी है। उन्होंने भी मुझे कहा कि तुम्हें किसी भी प्रकार की चिंता करने की जरूरत नहीं है। तुम सिर्फ अपना ध्यान रखो  अब मैं अपने मामा लोगों के साथ ही रहने लगा लेकिन कहीं ना कहीं मुझे उनके साथ रहना अच्छा नहीं लग रहा था। क्योंकि मैं सोच रहा था जब मेरी नौकरी लग जाएगी तो मैं अलग रहने लगूंगा।

मेरे मामा ने मेरे लिए नौकरी ढूंढ ली। मैं वहां पर नौकरी करने जाने लगा। उन्होंने मेरे लिए एक ऑफिस में बात की थी वहां पर मैं काम करने लगा। मुझे वहां पर काम करते हुए अब कुछ समय होने लगा था। मैंने एक दिन अपने मामा से कहा कि अब मैं अपने लिए कहीं अलग घर देख लेता हूं। आप लोगों को मेरी वजह से तकलीफ होती होगी। वह मुझ पर बहुत गुस्सा हो गए और कहने लगे कि तुम्हें कहीं भी जाने की आवश्यकता नहीं है। हम दोनों तो घर में अकेले ही हैं। यदि तुम कहीं और रहोगे तो हमें अच्छा थोड़ी लगेगा। उन्होंने मुझे इस बात के लिए साफ इनकार कर दिया और कहा कि तुम्हें बिल्कुल भी अलग नहीं रहना है। मेरे मामा बहुत ही अच्छे हैं और वह मेरा बहुत ही ध्यान रखते हैं। मुझे ऐसा लगता है कि जैसे वह मुझे अपने बच्चे की तरह रखते हैं। अब मैं अपने काम पर जाने लगा और वह जब अपने ऑफिस से वापस आ जाते तो हम लोग साथ में समय बिताते थे। एक दिन जब मामा जी ऑफिस से लौट रहे थे तो उनकी बाइक में किसी ने टक्कर मार दी और वह वहीं गिर पड़े। जिस वजह से उन्हें थोड़ा चोट आई थी  अब हमें उन्हें हॉस्पिटल ले जाना पड़ा। वह हॉस्पिटल में एडमिट है क्योंकि उन पर काफी ज्यादा चोट आई थी और वह घायल भी हो गए थे।

वह कुछ दिनों तक हॉस्पिटल में ही रहने वाले थे और मैं घर पर ही सारा काम देखा करता था। मुझे उनकी बहुत ही चिंता होती थी क्योंकि हॉस्पिटल में मेरी मामी उनके साथ ही रहती थी और डॉक्टर ने उन्हें आराम करने के लिए भी कह दिया था। कुछ दिन बाद वह सही होने लगे तो डॉक्टर ने उन्हें हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया और अब हम उन्हें घर पर ले आए। मैंने उनका बहुत ध्यान रखा। जिससे वह मुझे कहने लगे कि तुमने मेरा बहुत ही ज्यादा ध्यान रखा है। मैं तुमसे बहुत ही खुश हूं और मुझे बहुत ही अच्छा लगा कि जब तुमने मेरा इस तरीके से ध्यान रखा लेकिन मैं कहीं ना कहीं इस बात से दुखी था कि उन्हें बहुत ज्यादा चोट आई थी और जिसकी वजह से वह काफी समय तक अपने ऑफिस नहीं जा सकते थे। क्योंकि डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी थी और वह ऑफिस नहीं जा सकते थे। अब मैं ही ऑफिस जाया करता था और जब मैं वापस आता हूं तो मेरी मामी मेरे लिए खाना बना कर रखती थी। क्योंकि ऑफिस से आते वक्त मुझे बहुत देर हो जाती थी। ऑफिस में मेरे अब दोस्त बनने लगे थे। जिनके साथ में उठने बैठने लगा था क्योंकि वह लोग जयपुर के ही रहने वाले थे। जैसे-जैसे मेरी दोस्ती जयपुर में ज्यादा बढ़ती गई तो अब मैं उनके साथ ही शराब पी लिया करता था। पहले मुझे शराब की लत नहीं थी परंतु अब मुझे शराब की आदत होने लगी थी। जब भी मैं ऑफिस से वापस लौटता था तो मैं हमेशा ही शराब पीकर घर लौटता था लेकिन इस बात की भनक कभी मेरे मामा को नहीं लगी और ना ही मेरी मामी को इस बात की जानकारी थी। क्योंकि मैं जब भी घर लौटता हूं तो उनके साथ बहुत ही अच्छे से बर्ताव करता था और वह बहुत ही खुश रहते थे। क्योंकि मैं उनके हर काम कर दिया करता था। घर में जितनी भी चीजें या सामान लानी होती थी तो मैं वह सब अपनी छुट्टी के दिन ले आता था। मैं उनसे अलग रहने की भी बात नहीं कर सकता था। क्योंकि मैंने उनसे जब पहले इस बारे में चर्चा की थी तो उन्हें बहुत ही ज्यादा बुरा लगा था।

मैं अलग रहने की सोच तो रहा था क्योंकि अब मेरे दोस्त और मैं साथ मे पार्टी कर लिया करते थे। इस वजह से मैं सोचता था कि कहीं पर मैं अलग से घर ले लूँ। जिससे कि हम लोग वहीं पर पार्टी कर लिया करेंगे और मुझे अपनी लाइफ जीने में भी अच्छा लगेगा। ऑफिस में ही मेरी एक गर्लफ्रेंड बन गई थी। जिससे कि मैं फोन पर काफी देर बातें किया करता था और वह भी मुझसे बहुत देर तक फोन पर बातें किया करती थी। कई बार मेरी मामी ने मुझे फोन पर बातें करते हुए देख लिया था। परंतु फिर भी वह मुझे कुछ नहीं कहती थी और उन्होंने शायद इस बारे में मेरे मामा से भी कहा था। मेरे मामा मुझे कहते रहते की यदि तुम्हें कोई लड़की पसंद हो तो तुम मुझे बता देना। मैंने कहा नहीं, ऐसी कोई भी बात नहीं है। मुझे कोई भी लड़की पसंद नहीं है। मैं सिर्फ अपने ऑफिस से ही मतलब रखता हूं और अपने ऑफिस से सीधा घर आ जाता हूं।

मैं अपनी गर्लफ्रेंड से फोन में बात कर रहा था और मैं मुट्ठ मार रहा था। तभी मेरी मामी मेरे कमरे में आ गई और उन्होंने मुझे देख लिया। अब वह मेरे पास आई और उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया। मैं अभी भी अपनी गर्लफ्रेंड से फोन पर बात कर रहा था और वह मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर चूसे जा रही थी। उन्होंने इतने अच्छे से मेरे लंड को चूसा कि मेरा वीर्य गिरने वाला था और जैसे ही मेरा वीर्य गिरा तो उन्होंने मेरे लंड को  बाहर निकालते हुए अपने कपड़े खोल दिया। वह दोबारा से मेरे लंड को हिलाने लगी अब मैंने अपना फोन काट दिया और उनकी योनि के अंदर अपना लंड डाल दिया। मैंने जब उनकी बड़ी-बड़ी चूतडो को अपने हाथ में पकड़ा तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था क्योंकि उनमें अब भी बहुत जवानी बची हुई थी। जैसे ही मैंने अपने लंड को उनकी योनि में डाला तो वह कहने लगी कि तुमने मेरी इच्छाओं को पूरा कर दिया है। इतने वर्षों से तुम्हारे मामा मेरी इच्छा पूरी नहीं कर पा रहे थे और तुमने तो मेरी इच्छाओं को अच्छे से पूरा कर दिया है। अब मैं उन्हें ऐसे ही चोदे जा रहा था और वह मेरा पूरा साथ दे रही थी। वह अपनी चूतडे मुझसे मिलाए जा रही थी। मैं भी उन्हें बड़ी तेजी से धक्के दिया जा रहा था मुझे इतना मजा आ रहा था उन्हें धक्के मारने में की मेरा शरीर पूरा गर्म हो चुका था और उनके चूतड़ों से भी आग निकलने लगी थी। मैं उनके चूत की गर्मी को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। फिर भी मैं उन्हें धक्के मारे जा रहा था पर एक समय बाद  मेरा वीर्य गिरने वाला था और वह उनकी चूत के अंदर ही गिर गया। जब मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो मुझे बहुत ही मजा आया और वह मुझे कहने लगी कि अब तुम मेरी चूत हमेशा ही मारा करो। क्योंकि तुम्हारे मामा की बस की बात नहीं है इसलिए तुम ही मेरी इच्छाओं को पूरा किया करोगे। यदि तुम ऐसा नहीं करोगे तो मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड के बारे में तुम्हारे मामा को बता दूंगी अब मुझे उनकी चूत मारनी ही पड़ती है।


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